गांव में हाईस्कूल नहीं, तो समाजसेवा,बालिकाओं के लिए अप्रैल में खोला जाएगा सिलाई केंद्र

 मुरैना. खुमानीपुरा गांव में कबड्‌डी खेलतीं बालिकाएं।

मुरैना. खुमानीपुरा गांव में कबड्‌डी खेलतीं बालिकाएं।

 खुमानीपुरा में रहने वाली मीनू के पिता सियाराम और मां रामवती की इच्छा थी कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर काबिल बने, लेकिन गांव में मात्र एक अर्द्ध शासकीय प्राइमरी स्कूल होने के कारण उन्होंने बेटी को आठवीं तक तो तीन किलोमीटर दूर गांव छैरा में पढ़ाया। इसके बाद की पढ़ाई की समस्या फिर आई। ग
रीब माता-पिता सयानी होती बेटी को जौरा पढ़ने नहीं भेज पा रहे थे। इस बीच गांव में पहुंचीं तीन समाजसेवी संस्थाओं ने कुछ ऐसा किया कि अब न केवल मीनू, बल्कि गरीब खेतिहर मजदूर किसानों की बेटियां गांव में खुद ही पढ़ने लगीं। इन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षकों की व्यवस्था भी गांव में ही हो गई। अब गांव की 240 बेटियां अपने ही गांव में प्राइमरी से हाईस्कूल तक की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इस गांव में 350 के करीब बालिकाएं हैं, जिनमें से कुछ स्कूल जाती हैं, बाकी गांव में ही पढ़ती हैं।

गांव से ही तैयार किए शिक्षक :बालिकाओं को पढ़ाने के लिए देशराज, गजराज व रामवीर को जिम्मेदारी सौंपी गई। तीनों शिक्षकों ने जिम्मा लिया कि वे इन बालिकाओं को पढ़ाएंगे। अच्छी बात यह है कि जिन बालिकाओं के माता-पिता फीस देने लायक हैं, उनसे तो न्यूनतम पारिश्रमिक लिया जाता है, जबकि जो सक्षम नहीं हैं, उन्हें मुफ्त शिक्षा दी जा रही है।

जागरूकता रैली निकाली : 14 नवंबर को खुमानीपुरा की बालिकाओं ने गांव में एक जागरूकता रैली निकाली। जिसमें शिक्षा अनिवार्य रूप से ग्रहण करने का संदेश दिया गया।

पहल 15 दिन में अवश्य पहुंचती है गांव में : खुमानीपुरा में पहल संस्था एक महीने में दो बार अनिवार्य रूप से पहुंचती है। इसकी सदस्य आशा सिंह एडवोकेट अपने साथ डीएसपी मुख्यालय अंजुलता पटले को भी एक बार गांव में ले गईं। बालिकाएं इनसे मिलकर खुश हुईं। प्रियंका नामक बालिका ने तो ठान लिया है कि उसे डीएसपी ही बनना है। वह 10वीं के बाद इंटर पास करेगी और बीए करके पीएससी की तैयारी करेगी।

ये बालिकाएं पढ़ रहीं गांव में :खुमानीपुरा में मीनू, प्रीती, कविता, भारती, प्रियंका, सरिता, भावना, आशा, सोनम, सरस्वती, काजल, अंजली, अंकिता, प्रतिभा, सुहानी, राधा, करीना, महेश्वरी, नीरज, पूनम, सुरक्षा, पूजा, राखी, मोनिका, चंचल, लक्ष्मी आदि करीब ढाई सौ बालिकाएं पढ़ रही हैं। इनमें से कुछ जौरा के स्कूल भी जा रही हैं।

ये होने वाला है : बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांव में अप्रैल में सिलाई केंद्र खोला जाएगा।

बालिकाओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अप्रैल के अंत में एक शिविर लगाया जाएगा।

गांव में लाइब्रेरी खोली गई है : बालिकाओं के लिए एक लाइब्रेरी खोली गई, जिसमें 200 पुस्तिकाएं रखवाई गईं।

बालिकाओं के लिए ब्लैक बोर्ड आदि के इंतजाम भी पहल संस्था ने किए हैं।

उत्साहित बालिकाएं भी अपनी पॉकेट मनी बचाकर कुछ किताबें लाइब्रेरी के लिए लाई हैं।

बालिकाओं के लिए खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई गई, साथ ही बिना सामग्री वाले खेल कबड्डी व खो-खो शुरू कराए।

बालिकाएं जौरा से कैरम खरीद लाईं। उन्होंने अपने लिए एक स्पोर्ट्स क्लब भी गांव में गठित किया है।

गांव की बेटियों को शिक्षा व खेलों के प्रति संस्थाओं ने किया जागरूक : जौरा के खुमानीपुरा में छह महीने पहले आंगन नामक संस्था ने कदम रखा। साथ ही यह संस्था अपने साथ संगिनी व पहल को भी लेकर गई। इन तीन संस्थाओं ने इस गांव में बेटियों के बीच शिक्षा व खेलों संबंधी जागरूकता फैलाई और वहां इनकी पढ़ाई के प्रबंध किए। फिर समाजसेवी संस्था पहल ने इस गांव को गोद लेकर काम शुरू किया।

प्राइवेट परीक्षा देंगे : ”आठवीं तक तो हम छैरा में ही पढ़े। अब 10वीं की तैयारी अपने गांव से ही कर रहे हैं। प्राइवेट परीक्षा देंगे।”मीनू, कक्षा 10 खुमानीपुरा

गांव में ही कर रहे पढ़ाई : ”आठवीं तक छैरा गांव में पढ़ाई की। उसके बाद तो जौरा में ही हाईस्कूल है। इसलिए अब हम अपने गांव में ही पढ़ते हैं। ”प्रीती, कक्षा 10 खुमानीपुरा

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