महिला साक्षरता के मामले में उत्तर प्रदेश का देश में ३१ वां स्थान है। लड़कों की प्राथमिक शिक्षा पूरी करने की दर जहाँ 50% है वहीँ लड़कियों की दर सिर्फ 27% ही है। सबसे अधिक वंचित समूह की बालिकाएं दलित व मुस्लिम समुदायों की हैं। राष्ट्रीय जनगणना संसथान के आंकड़ों के अनुसार, मुस्लिम बालिकाओं व ग्रामीण उत्तर प्रदेश की महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 26.7% है और सिर्फ 9.6% ही अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी कर पाती हैं। दलित बालिकाओं की ग्रामीण साक्षरता दर अत्यंत ही ख़राब है व 24.6% आंकी गयी है और इनमे केवल 10.4% ही अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी कर पाती हैं।
शिक्षा की असंतोषजनक स्थिति का पता अन आई यू पी ऐ द्वारा जारी किये गए शिक्षा के विकास के सूचकों से ही पता चल जाता है। इन आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में ३५ राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश का स्थान २७ वां है और उच्च प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में राज्य 30 वें स्थान पर है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् की एक ताज़ी रिपोर्ट के अनुसार लगभग 38543 घर बिना प्राथमिक विद्यालयों के हैं या शिक्षा गारंटी योजना के कार्यक्षेत्र से बाहर हैं। उत्तर प्रदेश के लगभग 20 जिलों में साक्षरता दर 50 % से कम है। इसके अलावा हाशिये व वंचित समुदायों के 7.85 लाख बच्चे अभी भी मुख्यधारा से बाहर हैं। दलित व आदिवासी बच्चों के साथ साथ मुस्लिम लड़कियों के नामांकन का स्तर राष्ट्रीय औसत से कम बना हुआ है। साथ ही मुस्लिम बच्चों की एक बड़ी संख्या 15000 से अधिक मदरसों व 10000 से अधिक मख्ताबों में नामांकित हैं। ये दोनों ही प्रकार के औपचारिक व अनौपचारिक विद्यालय धार्मिक शिक्षा व उर्दू सिखाने के लिए राज्य भर में चल रहे हैं. मदरसे, प्रवाह के प्रतिकूल चल रहे संसथान होते हैं जो की गरीब मुस्लिम परिवारों से आनेवाले बच्चों को अस्थिर व अपर्याप्त शिक्षा देते हैं. उनकी स्थिति की अंदाज़ा उनके कमज़ोर बुनियादी ढांचों, पुराने व अप्रचलित अध्यापन, निम्न स्तरीय शिक्षकों व सीखने के अत्यधिक निम्न परिणामों से लगाया जा सकता है ड्रॉप आउट बच्चों की दर चेतावनीपूर्ण है खासतौर पर हाशिये पर रहनेवाले परिवारों के बच्चों की क्यूंकि इन बच्चों के द्रोपौत की दर ऊंची जाती व समुदायों से आनेवाले बच्चों से ज्यादा होती है (4). इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य ये है किऐसे कई बच्चे जो कि सरकारी विद्यालयों से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं वे ठीक से पढ़ लिख नहीं पाते और न ही अंकगणित के साधारण सवाल ही सुलझा पाते हैं। शिक्षा कि इस स्थिति के लिए कई कारक ज़िम्मेदार हैं।(अतुल कुमार श्रीवास्तव)

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