अक्षय पात्र का बढ़ेगा दायरा

अतुल कुमार श्रीवास्तव  

इंफोसिस और टाटा ग्रुप की फिलंथ्रापिक यूनिट्स यानी परोपकार से जुड़े काम करने वाली इकाइयां मिलकर 200 करोड़ रूपये से ज्यादा बेंगलुरू के एनजीओ  अक्षय पात्र को देंगी। यह संगठन स्कूलों में लंच प्रोग्राम चलाता है। यह दुनिया में किसी एनजीओ कि ओर से चलाया जाने वाला इस तरह का सबसे बड़ा कार्यक्रम है। इस रूपये का उपयोग अक्षय पात्र के कामकाज का दायरा बढ़ाने और ताजातरीन फूड टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा। ताकि खाना जल्द बन सके, उसकी लागत घटे और गुणवत्ता भी बेहतर हो सके।

इंफोसिस के फाउंडर एन नारायनमूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति के नेतृत्व वाला ‘द् इंफोसिस फाउंडेशन’127 करोड़ रूपये देगा, जिससे तीन आधुनिक किचेन बनाये जाएंगे। इसके अलावा 20 करोड़ और देगा। जमशेद जी टाटा ट्रस्ट 55 करोड़ रूपये देगा, जिससे एनजीओ को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी हासिल करने और फूड सेफ्टी बेहतर करने में उपयोग किया जाएगा। अक्षय पात्र के काम करने के मॉडल की अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2008 में प्रसंशा की थी।उन्होंने कहा था कि इसे दूसरे देशों में भी अपनाया जाना चाहिए।

इसे ‘इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्ण कांशशनेस’ चलाती हैं। इस रकम के साथ संगठन अगले पांच वर्षों में 10 राज्यों में 50 लाख बच्चों को सुविधा देने का लक्ष्य बनाएगा। अभी यह 15 लाख बच्चों को खाना मुहैया कराता है। इंफोसिस से मिलने वाली रकम से जोधपुर और हैदराबाद में मॉडर्न किचेन बनाए जाएगें।

जोधपुर वाले किचेन में रोज 50,000 बच्चों के लिए और हैदराबाद के किचेन में 1 लाख बच्चों के लिए खाना बनाने की क्षमता होगी।आईटी कम्पनी जोधपुर,हैदराबाद और मैसूर में किचेन को ऑपरेशन कास्ट भी देगी। साथ ही वह राजस्थान में लगभग 1.5 लाख बच्चों को दिए जाने वाले भोजन और बोतल बंद पेयजल का खर्च उठाएगी। टाटा ग्रुप देशभर में 22 किचेन के लिए क्वालिफाइड फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर्स की हायरिंग और अहमदाबाद, बेंगलुरू, भुवनेश्वर,और लखनऊ में चार मार्डन फूड लैब्स का खर्च उठाएगी। इनमें से हर लैब पर करीब 50 लाख का खर्च आएगा।

(स्रोत- इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्ण कांशशनेस)

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