सर्व शिक्षा अभियान की गाइड लाइंस

http://www.upefa.com/upefaweb/admin/myuploads/SSA_Frame_work_(revised)_9-6-2011.pdf

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सर्व शिक्षा अभियान- परिचय

भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 (यथा अधतनीकृत नीति-1992) एवंकार्यक्रम क्रियान्वयन परियोजना, 1992 के अन्तर्गत प्राथमिक शिक्षा अर्थात कक्षा-8 तक की शिक्षा  को सर्वजन सुलभ करने की राष्ट्रीय वचनबद्धता की पुन: पुष्टि करती है।एनण्पीण्र्इण् के प्रस्तर 5.12 में यह निर्णय पारित हो चुका है कि 21वीं शताब्दी केआगमन के पूर्व यथेष्ट कोटि की गुणवत्ता प्रधान मुक्त एवं अनिवार्य शिक्षा 14 वर्ष कीआयु तक के सभी बच्चों को प्रदान की जायेगी।उपरोक्त को दृष्टिगत रखते हुये, प्रदेश में उच्च कोटि की प्राथमिक शिक्षा केअभिवृद्धि एवं व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु विष्व बैंक समर्थित बेसिक शिक्षा परियोजना. वर्ष 1993 से स्वीकृत एवं क्रियानिवत की गयी। इस परियोजना के निर्विघ्न क्रियान्वयन हेतुसंस्था पंजीयन अधिनियम, 1860 के अन्तर्गत ”उत्तर प्रदेश सभी के लिये शिक्षापरियोजना परिषद 17 मर्इ, 1993 को स्थापित की गयी। इसके उददेष्य हैं -स्वायत्तशासी एवं स्वतन्त्र इकार्इ के रूप में कार्यरत यह परिषद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परियोजना की रूपरेखा सहित प्रकाशित अभिलेख एवं समय-समय परपुनरीक्षण के आधार पर तैयार किये गये संशोधित प्रारूप के अनुसार सर्व शिक्षापरियोजना (जो अब ”परियोजना सन्दर्भित की जायेगी) को क्रियानिवत करेगी। परिषदकी गतिविधियां चयनित जनपदों में ही केनिद्रत रहेंगी तथापि चयनित एवं समर्थितपरियोजनाओं के दृष्टिगतपरियोजना सम्पूर्ण प्रदेश् में विस्तारित की जा सकेगी। परिषदकी स्थापना लक्ष्य प्रापित के निमित्त की गयी है ताकि बेसिक शिक्षा व्यवस्था मेंआधारभूत परिवर्तन क्रियानिवत करते हुये समग्र रूप में सम्पूर्ण सामाजिक- सांस्कृतिक परिवेष में आमूल-चूल परिवर्तन किया जा सके। परिषद निम्नलिखित उददेष्यों कीप्रतिपूर्ति हेतु कार्यरत रहेगी –

  • शिक्षा की समग्रता एवं सार्वजनिकता को दृशिटगत रखते हुए . (1) 14वर्ष की सीमा तक के सभी बच्चों हेतु प्राथमिक शिक्षा के निमित्त प्रवेश मार्गनिर्मित करना (2)औपचारिक अथवा अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से प्राथमिक स्तर की शिक्षा पूर्ण होने तक सभी की प्रतिभागिता (3)सभी को न्यूनतमस्तर की शिक्षा प्रापित के योग्य बनाना।
  • युवाओं हेतु शिक्षा एवं कौशल विकास के प्राविधानों का संचालन।
  • शिक्षा के क्षेत्र में लिंग समानता एवं महिला सषक्तीकरण के सुझावों को अधिकाधिक लागू करना।
  • अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति एवं समाज के गरीब वर्ग के बच्चों को शिक्षा का समान अवसर प्रदान करने हेतु आवष्यक हस्तक्षेप करना।
  • संस्कृति, संचार, विज्ञान, पर्यावरण आदि विषयक समस्त शैक्षिक गतिविधियों को विशेष महत्व देते हुए सामाजिक न्याय की भावना को विकसित करना।

1993 में प्रारम्भ की गयी बेसिक शिक्षा परियोजना 17 जनपदों में क्रियानिवत की गयी। यह परियोजना वर्ष 2000 में पूर्ण हो गयी। वर्ष 1997 में प्रारम्भ की गयी जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम की द्वितीय श्रृंखला प्रदेश के 22 जनपदों में क्रियानिवत की गयी जो वर्ष 2003 में पूर्ण हो गयी। इसके अतिरिक्त डी० पी० ई० पी० (फेज-3) अर्थात उपयर्ुक्त परियोजना की तीसरी श्रृंखला वर्ष 2000 में प्रदेश के 32 जनपदों में क्रियानिवत की गयी और यह श्रृंखला भी 31 मार्च, 2006 को पूर्ण हो गयी। जनशाला परियोजना वर्ष 2000 से 2003 के मध्य लखनऊ जनपद मेंक्रियानिवत की गयी। वर्ष 2001-2002 में सर्व शिक्षा अभियान परियोजना 16 जनपदों में प्रारम्भ की गयी और सम्प्रति यह परियोजना प्रदेश के सभी जनपदों में क्रियानिवत की जा रही है।

सर्व शिक्षा अभियान

सर्व शिक्षा अभियान का कार्यान्वययन वर्ष 2000-2001 से किया जा रहा है जिसका उद्देश्यर सार्वभौमिक सुलभता एवं प्रतिधारण, प्रारंभिक शिक्षा में बालक-बालिका एवं सामाजिक श्रेणी के अंतरों को दूर करने तथा अधिगम की गुणवत्ताद में सुधार हेतु विविध अंत:क्षेपों में अन्य- बातों के साथ-साथ नए स्कूकल खोला जाना तथा वैकल्पिक स्कूमली सुविधाएं प्रदान करना, स्कू‍लों एवं अतिरिक्ति कक्षा-कक्षों का निर्माण किया जाना, प्रसाधन-कक्ष एवं पेयजल सुविधा प्रदान करना, अध्याूपकों का प्रावधान करना, नियमित अध्यांपकों का सेवाकालीन प्रशिक्षण तथा अकादमिक संसाधन सहायता, नि:शुल्कल पाठ्य-पुस्तंकें एवं वर्दियां तथा अधिगम स्तयरों/परिणामों में सुधार हेतु सहायता प्रदान करना शामिल है। शिक्षा अभियान के दृष्टिकोण, रणनीतियों एवं मानदंडों में प्रारंभिक शिक्षा के विजन एवं दृष्टिकोण को शामिल किया गया है, जो निम्नालिखित सिद्धांतों द्वारा निर्देशित है :-
• राष्ट्री य पाठ्यक्रम ढांचा, 2005 यथा व्यािख्याियित शिक्षा का सम्पूदर्ण दृष्टिकोण और पाठ्यक्रम, शिक्षक शिक्षा, शैक्षिक योजना और प्रबंध के लिए उल्लेरखनीय निहितार्थों के साथ सम्पूठर्ण सामग्री और शिक्षा के प्रोसेस के क्रमबद्ध पुनरूद्धार के निहितार्थ।
• साम्योता का अर्थ न केवल समान अवसर अपितु ऐसी स्थितियों का सृजन है जिनमें समाज के अपहित वर्गों- अ.जा.,अ.ज.जा.,मुस्लिम अल्पासंख्य क, भूमिहीन कृषि कामगारों के बच्चेथ और विशेष जरूरत वाले बच्चेि आदि – अवसर का लाभ ले सकते हैं।
• पहुंच यह सुनिश्चित करने के लिए सीमित नहीं होनी चाहिए कि विनिर्दिष्टज दूरी के अंदर सभी बच्चेह स्कू ल पहुंच योग्यर हो जाएं परंतु इसमें पारम्पअरिक रूप से छोड़ी गई श्रेणियों- अ.जा.,अ.ज.जा. और अय् स धिक अपहित समूहों के अन्या वर्गों मुस्लिम अल्प संख्युक, सामान्यप रूप से लड़कियां और विशेष जरूरतों वाले बच्चोंे की शैक्षिक जरूरतों और दुर्दशा को समझना निहित है।
• बालक-बालिका सोच, न केवल लड़कों के साथ लड़कियों को बराबर करने का प्रयास है, अपितु शिक्षा पर राष्ट्री य नीति 1986/92 में बताए गए परिप्रेक्ष्यस में शिक्षा को देखना अर्थात महिलाओं की स्थिति में बुनियादी परिवर्तन लाने के लिए निश्चाायक हस्त क्षेप।
• उनको अभिनव परिवर्तन और कक्षा में और कक्षा से दूर संस्कृ्ति के सृजन के लिए प्रोत्साचहित करने के लिए शिक्षक की केन्द्री यता जो बच्चों9, विशेष रूप से उत्पीनडि़त और उपेक्षित पृष्ठ भूमि से लड़कियों के लिए समावेशी परिवेश पैदा कर सकती है।
• आरटीई अधिनियम के माध्य्म से अभिभावकों, अध्यालपकों, शैक्षिक प्रशासकों और अन्य हिस्से‍दारों पर दण्डांत्मेक प्रक्रियाओं पर बल देने की बजाए नैतिक बाध्यरताएं लगाना।
• शैक्षिक प्रबंध की अभिसारी और एकीकृत प्रणाली आरटीई कानून के कार्यान्वययन के लिए पूर्व-अपेक्षा है। सभी राज्योंे को उस दिशा में उतनी तेजी से बढ़ना है जितना व्यिवहार्य हो।

सर्व शिक्षा अभियान के राष्ट्रीऔय पोर्टल के लिए एमआईएस को लिंक करें :

• संयुक्त समीक्षा मिशन(link is external)
• सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार फ्रेमवर्क
• 4 वर्ष के, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009
• सर्व शिक्षा अभियान के राष्ट्रीकय मिशन की शासी परिषद और कार्यपालक समिति का पुनर्गठन
• सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) कार्यक्रम, मध्यापह्न भोजन (एमडीएम) और राष्ट्रीेय माध्यिमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) कार्यक्रम – इन कार्यक्रमों/स्की‍मों की मॉनीटरिंग के लिए जिला स्त(र की समिति का गठन
• आंशिक संशोधन – सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) कार्यक्रम, मध्या्ह्न भोजन (एमडीएम) और राष्ट्रीउय माध्ययमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) कार्यक्रम – इन कार्यक्रमों/स्कीसमों की मॉनीटरिंग के लिए जिला स्तरर की समिति का गठन
• पढ़े भारत बढ़े भारत (समझ के साथ प्रारंभिक पठन एवं लेखन तथा प्रारंभिक गणित कार्यक्रम)
• एनसीईआरटी द्वारा विकसित पाठ्यक्रम रूपांतरों – विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (प्राथमिक स्तर) सहित
• “स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय” पर एक पुस्तिका (हिन्दी)

शिक्षा का अधिकार

शिक्षा का अधिकार अधिनियम शिक्षा किसी भी व्यक्ति एवं समाज के समग्र विकास तथा सशक्तीकरण के लिए आधारभूत मानव मौलिक अधिकार है। यूनेस्को की शिक्षा के लिए वैश्विक मॉनिटरिंग रिपोर्ट 2010(पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) के मुताबिक, लगभग 135 देशों ने अपने संविधान में शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है तथा मुफ्त एवं भेदभाव रहित शिक्षा सबको देने का प्रावधान किया है। भारत ने 1950 में 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए मुफ्त तथा अनिवार्य शिक्षा देने के लिए संविधान में प्रतिबद्धता का प्रावधान किया था। इसे अनुच्छेद 45 के तहत राज्यों के नीति निर्देशक सिद्धातों में शामिल किया गया है। 12 दिसंबर 2002 को संविधान में 86वां संशोधन किया गया और इसके अनुच्छेद 21ए(पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) को संशोधित करके शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया गया है। बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिनियम(पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) 1 अप्रैल 2010 को पूर्ण रूप से लागू हुआ। इस अधिनियम के तहत छह से लेकर चौदह वर्ष के सभी बच्चों के लिए शिक्षा को पूर्णतः मुफ्त एवं अनिवार्य कर दिया गया है। अब यह केंद्र तथा राज्यों के लिए कानूनी बाध्यता है कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा सभी को सुलभ हो सके। अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं • छह से चौदह वर्ष तक के हर बच्चे के लिए नजदीकी विद्यालय में मुफ्त आधारभूत शिक्षा अनिवार्य है। • इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बच्चों से किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और न ही उन्हें शुल्क अथवा किसी खर्च की वजह से आधारभूत शिक्षा लेने से रोका जा सकेगा। • यदि छह के अधिक उम्र का कोई भी बच्चा किन्हीं कारणों से विद्यालय नहीं जा पाता है तो उसे शिक्षा के लिए उसकी उम्र के अनुसार उचित कक्षा में प्रवेश दिलवाया जाएगा। • इस अधिनियम के प्रावधानों को कियान्वित करने के लिए संबंधित सरकार तथा स्थानीय प्रशासन को यदि आवश्यक हुआ तो विद्यालय भी खोलना होगा। अधिनियम के तहत यदि किसी क्षेत्र में विद्यालय नहीं है तो वहां पर तीन वर्षों की तय अवधि में विद्यालय का निर्माण करवाया जाना आवश्यक है। • इस अधिनियम के प्रावधानों को अमल में लाने की जिम्मेदारी केंद्र एवं राज्य सरकार, दोनों की है, तथा इसके लिए होने वाल धन खर्च भी इनकी समवर्ती जिम्मेदारी रहेगी। यह अधिनियम माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तथा बच्चों तक शिक्षा को पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अधिनियम का सर्वाधिक लाभ श्रमिकों के बच्चे, बाल मजदूर, प्रवासी बच्चे, विशेष आवश्यकता वाले बच्चे या फिर ऐसे बच्चे जो सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, भौगोलिक, भाषाई अथवा लिंग कारकों की वजह से शिक्षा से वंचित बच्चों को मिलेगा। इस अधिनियम के कार्यान्वयन के साथ ही यह उम्मीद भी है कि इससे विद्यालय छोड़ने वाले तथा विद्यालय न जाने वाले बच्चों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा, प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से दी जा सकेगी। भारत सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम(बाहरी विंडो में खुलने वाली वेबसाइट) बनाने का कदम ऐतिहासिक कहा जा सकता है तथा इससे यह भी तय हो गया है कि हमारा देश सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (एमजीडी) तथा सभी के लिए शिक्षा (ईएफए) के नजदीक पहुंच रहा है।